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झारखंड मोबाइल वाणी ने चलाया कैंपेन, कई सच आये सामने

Regional media of Jharkhand PNN7 covers the realities unearthed by our ‘Campaign on Education’ on the Mobile Vaani network. Read the original source here.

रांची (पीएनएन7 संवाददाता)। झारखंड में शिक्षा की नीति पूरी तरह ध्वस्त हो गयी है। किसी भी योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा हैं। कुछेक उदाहरण को छोड़ दिया जाये, तो राज्य के सभी जिलों में स्कूल है, तो शिक्षक नहीं और विद्यार्थी हैं तो कमरे नहीं। इस स्थिति में राज्य सरकार पर शिक्षा में नीतिगत सुधार का दबाव बना हुआ है। 

झारखंड मोबाइल वाणी के स्टैट मैनजर राकेश कुमार के अनुसार  झारखंड मोबाइल वाणी यानि जेएमवी पिछले 15 से 25 जून तक राज्य में शिक्षा की दशा और दिशा को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। कैंपेन का माध्यम झारखंड मोबाइल वाणी के नंबर 08800097458 पर  काल करना है। यह काल पूरी तरह निःशुल्क है।

झारखंड मोबाइल वाणी ने कैंपेन के तहत प्रत्येक दिन शिक्षा विशेषज्ञ से बातचीत भी की। पहली सीरिज 15 जून को प्रसारित की गयी कैंपेन एपीसोड में राज्य के पंचायतों एवं शिक्षा विशेषज्ञ सुधीर पाल ने कहा कि ‘‘ राज्य में शिक्षा व्यवस्था को दो ढंग से देख सकते हैं। पहला राइट टू एजुकेशन को लेकर सरकार आगे बढ़ रही है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। दूसरा आरटीइ के तहत प्रति बच्चा का अनुपात विफल है। अब तक राज्य में 200-250 बच्चों पर एक शिक्षक हैं। प्रति एक किलोमीटर के दायरे में स्कूल होने चाहिए, लेकिन यह मामला केवल कागजों में दिखता है। हद तो तब हो जाती है, जब  स्कूल को लेकर गांव वाले डिमांड करते हैं, तब अधिकारियों का जवाब होता है कि आपके यहां स्कूल नहीं हो सकता, क्योंकि आपके एक किलोमीटर की परिधि में स्कूल मौजूद है।

आरटीई के तहत 30 बच्चों पर एक शिक्षक का होना जरूरी है। स्कूल की आधारभूत संरचना तक नहीं हैं। कई स्कूलों में तो न शौचालय हैं, और न ही प्रेक्टिीकल लैब। आधारभूत संरचना ध्वस्त हो चुकी है। आंकड़ों और धरातल पर देखे जाये, तो राज्य में शिक्षा की स्थिति धराशायी हो गयी है। सरकार शिक्षा नीति को बेहतर तो बनाये ही, साथ ही एक बड़ा कैंपेन चलायें, जिससे आम लोगों को लाभ हो। ’’ रांची के कांके की रहने वाले अर्चना बाड़ा ने कहा कि शिक्षा की दिशा तो ठीक है, लेकिन दशा बेकार हो चुकी है। राज्य में शिक्षा नीति का धरातल पर नहीं उतार जा रहा है।

राज्य में सरकारी अधिकारियों की काफी कमी है। यानि शिक्षकों की तो काफी कमी है। ऐसे में राज्य में शिक्षा व्यव्स्था कानून के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता। राज्य में शिक्षकों को पढाई के अलावा अन्य कार्यों में लगाया जा रहा है। मतगणना और चुनाव जैसी कई कामों में शिक्षकों को नियुक्त किया जा रहा है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होती जा रही है। छह महीने बीतने के बाद भी बच्चों को पाठ्य पुस्तकें नहीं मिलती। यह राज्य सरकार की विफलता ही है। राज्य में भ्रश्ट शिक्षकों पर कार्रवाई भी करनी होगी।

लातेहार जिले के विवेक कुमार का कहना है कि ‘‘ जिले में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। जिले में एक भी सरकारी कालेज नहीं होने के कारण लोगों को यहां से 105 किमी दूर रांची जाना पड़ताल है। राज्य की अर्जुन मुंडा सरकार में शिक्षा मंत्री बैजनाथ राम के रहते हुए भी जिले में एक भी सरकारी कालेज नहीं खोले गये। पूरे जिले में मात्र 54 प्रतिशत ही जिले में शिक्षा दर है। प्राईमरी व हायर स्कूल की संख्या पूरे जिले में 1278 हैं। जिले के सभी विद्यालयों में मिड-डे-मिल में मैन्यू नहीं काम कर रहा है। नेतरहाट विद्यालय  हालांकि जिले की शान है। लेकिन जिले में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गयी है। जिले के 80 प्रतिशत स्कूलों में प्रधानाध्यापक हैं ही नहीं। इन विद्यालयों में प्रभारी के भरोसे स्कूल संचालित किये जा रहे हैं। ’’

गिरिडीह के रोहित वर्मा कहते हैं कि जिले में कई स्कूलों में शिक्षकों की काफी कमी है। दो शिक्षक, तीन कमरे और 500 विद्यार्थी हैं। सरकार से आग्रह है कि शिक्षकों और कमरों का शीघ्र निर्माण करें। इसी प्रकार जर्नादन महतो धनबाद से कहते हैं कि राज्य में शिक्षा नीति ही गड़बड़ है। शिक्षा नीति को बेहतर और बनाने की जरूरत हैं। धनबाद के ही राधु जी का कहना है कि शिक्षा को लेकर जिले में कई अभियान चलाये गये, हैं जिसका असर दिखता है। अब जबकि पंचायतों में अधिकारों का हस्तांतरण किया गया है, अब राज्य में शिक्षा का अधिकार पंचायतों में ही अमल कराना है।