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#lockdown: कमाई है नहीं, महंगाई भी आसमान पर

जब तक कोरोना वायरस की दवा नहीं बन जाती तब तक दुनियाभर में मौत का सिलसिला जारी रहेगा. भारत में इस मुसीबत को टालने की हर संभव कोशिश की जा रही है. दु​कानें बंद हैं, बाजार बंद, लोग घरों में बंद, परिवहन बंद.. कुल मिलाकर पूरा देश इस वक्त घर में है. जो लोग रास्तों पर हैं उनमें से अधिकांश मजदूर हैं जो किसी तरह अपने घर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं या फिर वो लोग जिन पर नागरिकों को आम जरूरत का सामान देने का जिम्मा है.

मसलन सब्जी, दूध और राशन वाले. ये वे जरूरतें हैं जो हर घर चाहता है. जब जनता को लॉक कर ही दिया गया है तो मजबूरी है कि किसी भी ​कीमत पर घर की जरूरत का सामान खरीदें. जिसका फायदा दुकानदार उठा रहे हैं. महंगाई अचानक आसमान छू रही है. ये बात हम नहीं कह रहे खुद आम जनता ने मोबाइलवाणी पर रिकॉर्ड की है.

बिहार राज्य के जिला मुंगेर के संदलपुर से सुबोध कुमार ने प्रमिला देवी से बात की. प्रमिला देवी अचानक महंगे हुए सब्जी के दामों से परेशान हैं. वो कहती हैं कि लॉकडाउन के कारण पूरा परिवार साथ रह रहा है. ऐसे में खर्च पहले से ज्यादा है. सब्जी तो रोज की जरूरत है. लेकिन घर पर स​ब्जी देने वाले मनमाने दाम वसूल रहे हैं. लॉकडाउन के बाद अचानक सब्जियों की कीमत दोगुनी हो गई है. ऐसे में हम क्या खाएं? राशन खरीदने जाना भी एक समस्या ही है. क्योंकि बाहर पुलिसवाले हैं और वे दुकानों तक भी नहीं पहुंचने दे रहे.

राजस्थान से दुर्गा राम ने साझा मंच मोबाइल वाणी पर बताया कि मजदूर किसी तरह अपने गांव पहुंचे हैं. उनके पास पैसे नहीं हैं ऐसे में महंगाई ने और मुश्किल पैदा कर दिया है. सब्जीवालों को इससे कोई मतलब नहीं है कि कौन गरीब है. वो कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण उनका व्यापार भी धीमा हो गया है इसलिए जो जितना मिल रहा है काम चला रहे हैं.

गाज़ीपुर ज़िला के जखनिया प्रखंड के मुरियारी ग्राम से अंकित बरला कहते हैं कि गांव में वैसे ही कम दुकानें होती हैं. पुलिस ने वो भी बंद करवादी हैं. चोरी—छिपे राशन की दुकानें खोल रहे हैं और मनमर्जी के दाम पर सामान दे रहे हैं. सरकार ने होम डिलेवरी के लिए कहा है तो उसका अतिरिक्त पैसा देना होता है. हम जिस ​मुसीबत में हैं उसमें तो किसी से शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं.ग़ाज़ीपुर जिला के जलालाबाद प्रखंड से उपेंद्र कुमार ने ग़ाज़ीपुर मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जब तक गाजीपुर में लॉकडाउन नहीं था तब तक किसी तरह काम चल रहा था. अब तो महंगाई बहुत ज्यादा है. सब्जीमंडी में हर व्यक्ति अलग—अलग दाम पर सब्जियां बेच रहा है. क्योंकि बाजार कुछ घंटे के लिए ही खुलता है इसलिए जल्दी में जो जैसा जितने में मिलता है खरीदना होता है. दुकानदार लोगों की मजबूरी का फायदा ले रहे हैं. आम आदमी वैसे ही साधारण खाना खा रहा था पर अब तो वो भी मुश्किल हो गया है. सरकार को लॉकडाउन के पहले मनमानी पर रोक लगानी चाहिए थी.